रात को लड़की की बॉडी नहीं जलाते तो जल जाता हाथरस
उत्तर प्रदेश के हाथरस कांड को दिल्ली की तर्ज पर जलाने का प्लान बनाने वाली पीएफआई के चार एजेंट यूपी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए हैं जिन्होंने खुलासा किया है कि कैसे हाथरस कांड को राजनीतिक पुल दिया गया और कैसे हाथरस को जलाने की प्लानिंग थी
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| Hathras CBI report |
हाथरस कांड का उत्तर प्रदेश सरकार ने दिया कोर्ट में हलफनामा
पुलिस द्वारा पीएफआई के एजेंटों को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने हाथरस कांड की गुत्थी सुलझाने में काफी सफलता हासिल मिली है सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि पीएफआई के चार एजेंट जो नकली मीडिया बनकर हाथरस को जलाने की प्लानिंग कर रहे थे हाथरस कांड में विदेशों से फंडिंग लाई गई और हाथरस को जलाने के लिए पूरी साजिश रची गई है.
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि अगर पुलिस द्वारा पीड़िता के सबको आधी रात में नहीं जलाया जाता तो हाथरस से जल जाता सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जब इस मामले में संज्ञान लिया गया तो सरकार की तरफ से यह हलफनामा दायर किया गया है कि प्रदेश में दंगे वह माहौल बिगड़ने से रोकने के लिए पीड़िता की लाश को रात में जलाया गया और अगर कुछ समय की देरी हो जाती तो असामाजिक तत्व पूरे प्रदेश को भटकने पर मजबूर कर देते और पूरे हाथरस को जलाने की प्लानिंग कर रहे PFI के 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है जो दिल्ली से हाथरस की तरफ कुछ कर रहे थे और पुलिस द्वारा मिली जानकारी के अनुसार यह चार लोग संदिग्ध माने जा रहे थे इसी कारण उनकी टोल प्लाजा पर चेकिंग की गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.
पकड़े गए 4 पीएफआई के एजेंट
पकड़े गए युवकों में एक मुजफ्फरनगर के नगला का रहने वाला और दूसरा अमरपुर का निवासी बताया जा रहा है अतिरिक्त रहमान और सिद्धकी बताए जा रहे हैं पीएफआई के कुल 4 एजेंटों को हाथरस में गलत रिपोर्टिंग और अंतरराष्ट्रीय साजिश के तहत इस्तेमाल किए गए फंड के प्रयोग करने के आरोप में पकड़ा गया है पुलिस ने बेहद गंभीर धाराओं के तहत उन पर मुकदमा दर्ज किया है जो दंगे फैलाने और संप्रदाय दंगों को भड़काने की साजिश रच रही थी
PFI एजेंट पर लगी यह आईपीसी की धारा
हाथरस के चंन्दपा थाने में आईपीसी की धारा 109(अपराध के लिए उकसाने), 124ए (देश की एकता और अखंडता को खतरा पहुंचाने की कोशिश-राजद्रोह) 120 बी (षडयंत्र), 153-ए (धर्म भाषा और जाति के आधार पर विद्वेष फैलाना), 153-बी (राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले बयान), 195(झूइे साक्षय गढ़ना) , 465 (कूटरचना) , 468 (कूटरचित दस्तावेजों का प्रयोग), 501(मानहानिकारक मुद्रण), 505 (भय का माहौल बनाने वाला बयान) और सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम 2008 की धारा 67 समेत कुल 20 धाराओं में रविवार को मुकदमा दर्ज किया गया है.

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